Posts

सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव

Image
हिंदुओं को लग रहा है कि आने वाले कुछ वर्षों में भारत मुस्लिम राष्ट्र बन जाएगा और भारत में औरंगजेब शासन आ जाएगा। - मुस्लिमों को लग रहा है कि RSS कुछ ही दिनों में ISIS जैसा खूंखार संगठन बन जाएगा और आतंकवाद का रंग भगवा हो जाएगा। - दलितों को लग रहा कि जल्द ही नई संविधान सभा गठित होने वाली है जिसमें मनुस्मृति के नियमों को लागू किया जाना है और उनके विकास में रिवर्स गियर लग जाएगा जो उन्हें सीधे उत्तर वैदिक काल में ले जाएगा। - सवर्ण को लग रहा है कि आरक्षण की वजह से उसकी युवा पीढ़ी बेरोजगार और बेचारी होती जा रही है। ये सभी कल्पनाएँ कहाँ से उपजीं?  क्या वास्तव में हमारे आसपास ऐसे हालात पनप रहें हैं या कुछ और?? अगर हम ईमानदारी से विश्लेषण करें तो पाएंगे कि असल में ये सारी अवधारणाएं वाट्सऐप और फेसबुक पर अंधाधुंध फैलाए जा रहे उन्मादी कापी पेस्ट का नतीजा हैं। ये कापी पेस्ट लंबे लंबे मैसेज,भड़काऊ फोटो और तमाम वीडियो की शक्ल में बहुतायत से प्रचलित हैं। अगर हम सोशल मीडिया की छद्म दुनिया से निकलकर अपने आसपास लोगों को देखें तो यकीनन एक सौहार्दपूर्ण भारत नज़र आएगा.. लेकिन अगर हम अभी...

प्रेरक प्रसंग - मन के विचार

Image
 प्रेरक प्रसंग एक समय की बात है... एक सन्त प्रात: काल भ्रमण हेतु समुद्र के तट पर पहुँचे... समुद्र के तट पर उन्होने एक पुरुष को देखा जो एक स्त्री की गोद में सर रख कर सोया हुआ था। पास में शराब की खाली बोतल पड़ी हुई थी. सन्त बहुत दु:खी हुए. उन्होने विचार किया कि ये मनुष्य कितना तामसिक और विलासी है, जो प्रात:काल शराब सेवन करके स्त्री की गोद में सर रख कर प्रेमालाप कर रहा है. थोड़ी देर बाद समुद्र से बचाओ, बचाओ की आवाज आई, सन्त ने देखा एक मनुष्य समुद्र में डूब रहा है, मगर स्वयं तैरना नहीं आने के कारण सन्त देखते रहने के अलावा कुछ नहीं कर सकते थे. स्त्री की गोद में सिर रख कर सोया हुआ व्यक्ति उठा और डूबने वाले को बचाने हेतु पानी में कूद गया. थोड़ी देर में उसने डूबने वाले को बचा लिया और किनारे ले आया. सन्त विचार में पड़ गए की इस व्यक्ति को बुरा कहें या भला. वो उसके पास गए और बोले भाई तुम कौन हो, और यहाँ क्या कर रहे हो...? उस व्यक्ति ने उत्तर दिया : — मैं एक मछुआरा हूँ मछली मारने का काम करता हूँ.आज कई दिनों बाद समुद्र से मछली पकड़ कर प्रात: जल्दी यहाँ लौटा हूँ. मे...

सुदामा और श्रीकृष्ण की माया

सुदामा ने एक बार श्रीकृष्ण ने पूछा कान्हा, प्रभु मैं आपकी माया के दर्शन करना चाहता हूं... कैसी होती है?" श्री कृष्ण ने टालना चाहा, लेकिन सुदामा की जिद पर श्री कृष्ण ने कहा, "अच्छा, कभी वक्त आएगा तो बताऊंगा|" और फिर एक दिन कहने लगे... सुदामा, आओ, गोमती में स्नान करने चलें| दोनों गोमती के तट पर गए| वस्त्र उतारे| दोनों नदी में उतरे... श्रीकृष्ण स्नान करके तट पर लौट आए| पीतांबर पहनने लगे... सुदामा ने देखा, कृष्ण तो तट पर चले गये है, मैं एक डुबकी और लगा लेता हूं... और जैसे ही सुदामा ने डुबकी लगाई... भगवान ने उसे अपनी माया का दर्शन कर दिया| सुदामा को लगा, गोमती में बाढ़ आ गई है, वह बहे जा रहे हैं, सुदामा जैसे-तैसे तक घाट के किनारे रुके| घाट पर चढ़े| घूमने लगे| घूमते-घूमते गांव के पास आए| वहां एक हथिनी ने उनके गले में फूल माला पहनाई| सुदामा हैरान हुए| लोग इकट्ठे हो गए| लोगों ने कहा, "हमारे देश के राजा की मृत्यु हो गई है| हमारा नियम है, राजा की मृत्यु के बाद हथिनी, जिस भी व्यक्ति के गले में माला पहना दे वही हमारा राजा होता है| हथिनी ने आपके गले में माला प...

पानीपत का तीसरा युद्ध और महिलाएं

History Capsules : जनवरी 1761 में पानीपत के तीसरे युद्ध में मराठाओं को हराने के बाद अहमद शाह अब्दाली 22 हज़ार मराठा स्त्रियों का अपहरण करके अफगानिस्तान ले जा रहा था. ये बात सिख सरदारों तक पहुंची और उन्होंने फैसला किया कि युद्ध में जो हुआ वो हुआ लेकिन हमारे देश की स्त्रियों को ये अफगानिस्तान बाजार में बेचने और अपने सैनिकों की हवस पूरी करने नहीं ले जा सकता. सिखों ने जत्थे बना कर अफगान सेना पर टुकड़ों में आक्रमण करने शुरू कर दिए और चेनाब नदी पार करने तक अफगान सेना को युद्ध में लूटा हुआ धन और बंदी बनायीं गयीं स्त्रियां छोड़ के पहाड़ों में निकलना पड़ा. ये वो सेना थी जो पानीपत जैसा विशाल युद्ध जीत के आयी थी. अहमद शाह अब्दाली सिखों की इस दिलेरी से बहुत नाराज़ हुआ..उसने तीन चार महीने बाद ही नूरुद्दीन के नेतृत्व में 12000 शाही सैनिकों को सयालकोट में मौजूद सिख किले पर हमला करने भेजा. चेनाब नदी के किनारे लड़े गए इस युद्ध में सिख हालांकि अफगानों से कम संख्या में थे लेकिन फिर भी उन्होंने नूरुद्दीन एंड टीम की जम के मार लगायी और नूरुद्दीन ने वहाँ से निकलने में ही भलाई समझी. नूरुद्दीन जब अपने सैनिकों ...

राम शबरी संवाद

एकटक देर तक उस सुपुरुष को निहारते रहने के बाद बुजुर्ग भीलनी के मुंह से बोल फूटे: "कहो राम! सबरी की डीह ढूंढ़ने में अधिक कष्ट तो नहीं हुआ?" राम मुस्कुराए: "यहां तो आना ही था मां, कष्ट का क्या मूल्य...?"     "जानते हो राम! तुम्हारी प्रतीक्षा तब से कर रही हूँ जब तुम जन्में भी नहीं थे। यह भी नहीं जानती थी कि तुम कौन हो? कैसे दिखते हो? क्यों आओगे मेरे पास..? बस इतना ज्ञात था कि कोई पुरुषोत्तम आएगा जो मेरी प्रतीक्षा का अंत करेगा..." राम ने कहा: "तभी तो मेरे जन्म के पूर्व ही तय हो चुका था कि राम को सबरी के आश्रम में जाना है।"      "एक बात बताऊँ प्रभु! भक्ति के दो भाव होते हैं। पहला मर्कट भाव, और दूसरा मार्जार भाव। बन्दर का बच्चा अपनी पूरी शक्ति लगाकर अपनी माँ का पेट पकड़े रहता है ताकि गिरे न... उसे सबसे अधिक भरोसा माँ पर ही होता है और वह उसे पूरी शक्ति से पकड़े रहता है। यही भक्ति का भी एक भाव है, जिसमें भक्त अपने ईश्वर को पूरी शक्ति से पकड़े रहता है। दिन रात उसकी आराधना करता है........ ".....पर मैंने यह भाव नहीं अपनाया। मैं तो उस...

हिंदी का थोडा़ आनंद लीजिये ....मुस्कुरायें

हिन्दी के मुहावरे, बड़े ही बावरे है, खाने पीने की चीजों से भरे है... कहीं पर फल है तो कहीं आटा-दालें है, कहीं पर मिठाई है, कहीं पर मसाले है , चलो, फलों से ही शुरू कर लेते है, एक एक कर सबके मजे लेते है...

लिट्टे संगठन क्या था? | What was LTTE terrorist organization

लिट्टे संगठन क्या था? | What was LTTE terrorist organization : - लिट्टे किसी जमाने में एक खूंखार आतंकवादी संगठन हुआ करता था।लिट्टे एक मात्र ऐसा आतंकवादी संगठन था जिसके पास स्वयं की वायुसेना और नौसेना थी