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बीरबल और अकबर की पहली मुलाकात | अकबर बीरबल की कहानी

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अकबर बीरबल की कहानी | बीरबल और अकबर की पहली मुलाकात किस्सा कुछ यों है: बादशाह अकबर ने पान की फरमाइश की। तुरंत शाही पान बनाने वाले कारीगर ने पान का बीड़ा बनाकर पेश किया। बादशाह ने जैसे ही पान खाया पान में चूना जरूरत से ज्यादा होने से मुंह मे तेज जलन हुई। अकबर ने पान बनाने वाले को कहा कि तुरंत एक सेर (किलो से कुछ कम मात्रा) चूना लेकर आये। तो बन्दा तुरंत किले से निकल कर बाज़ार में आया और एक पान बनाने वाले से जाकर कहा कि एक सेर चूना दे दो। वहीँ बीरबल भी पान खा रहे थे। उसे एक सेर चूना मांगते देखा तो पूछा भाई इतने ज़्यादा चूने का क्या करोगे तो बन्दे ने जवाब दिया कि शहनशाह का हुक्म है इसलिए ले जा रहा हूँ। बीरबल समझ गए कि क्या गड़बड़ हुई है। उसे कहा कि साथ मे एक सेर दही भी लेकर जाए। और अगर शाह उसे ये चूना खाने को कहे तो तुरंत खाये और पीछे से सारा दही पी ले। बन्दे को भी समझाया कि क्या माजरा है। अब जैसे ही बन्दा शाह के सामने पहुँचा बादशाह ने तुरंत हुक्म दिया कि सारा का सारा चूना उसे पिला दिया जाए। इतना चूना पीने से आदमी की मौत हो सकती है। परंतु बादशाह के हुक्म की तुरंत तामील की गई। जैसे ह...

आयुर्वेद में वर्णित सोना बनाने की कला

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आयुर्वेद में वर्णित स्वर्ण (सोना) बनाने की कला  〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ वैदिक मंत्र से धातु उत्पादन शक्ति क्या आप जानते है भारत को कभी सोने की चिड़िया कहा जाता था ! भारत पर लगभग 1200 वर्षों तक मुग़ल, फ़्रांसिसी, डच, पुर्तगाली, अंग्रेज और यूरोप एशिया के कई देशों ने शासन किया एवं इस दौरान भारत से लगभग 30 हजार लाख टन सोना भी लूटा ! यदि यह कहा जाए कि आज सम्पूर्ण विश्व में जो स्वर्ण आधारित सम्रद्धि दिखाई दे रही है वह भारत से लुटे हुए सोने पर ही टिकी हुई है तो गलत न होगा ! यह एक बड़ा रहस्यमय सवाल है कि आदिकाल से मध्यकाल तक जब भारत में एक भी सोने की खान नहीं हुआ करती थी तब भी भारत में इतना सोना आता कहाँ से था ? सबसे रहस्यमय प्रश्न यह है कि आखिर भारत में इतना स्वर्ण आया कहाँ से ? इसका एकमात्र जवाब यह है कि भारत के अन्दर हमारे ऋषि मुनियों ने जो आयुर्वेद विकसित किया उसमे औषधिय उपचार के लिए स्वर्ण भस्म आदि बनाने के लिए वनस्पतियों द्वारा स्वर्ण बनाने की विद्या विकसित की थी !  आयुर्वेद में स्वर्ण बनाने की विधि  〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ पवित्र हिन्दू धर्म ग्रन्थ ऋग्वेद पर ...

उडुपी और महाभारत का युद्ध

महाभारत अपने काल का सबसे बड़ा महायुद्ध था क्योंकि उस काल में शायद ही कोई ऐसा राज्य था जिसने इस युद्ध में भाग नहीं लिया। क्योकि इस युद्ध में भारत, अफगानिस्तान और ईरान तक के समस्त राजा कौरव अथवा पांडव के पक्ष में खड़े थे, किन्तु एक राज्य ऐसा था जो युद्ध क्षेत्र में होते हुए भी युद्ध से विरत था, वो था दक्षिण के उडुपी का राज्य। जब उडुपी के राजा युद्ध मे भाग लेने के लिए अपनी सेना सहित कुरुक्षेत्र पहुँचे तो कौरव और पांडव दोनों उन्हें अपनी ओर मिलाने का प्रयत्न करने लगे। उडुपी के राजा अत्यंत दूरदर्शी थे, उन्होंने श्रीकृष्ण से पूछा-हे माधव ! दोनों ओर से जिसे भी देखो युद्ध के लिए लालायित दिखता है किन्तु क्या किसी ने सोचा है कि दोनों ओर से उपस्थित इतनी विशाल सेना के भोजन का प्रबंध कैसे होगा...... ? इस पर श्रीकृष्ण ने कहा- महाराज ! आपने बिलकुल उचित सोचा है, आपके इस बात को छेड़ने पर मुझे प्रतीत होता है कि आपके पास इसकी कोई योजना है, अगर ऐसा है तो कृपया बताएं। इसपर उडुपी नरेश ने कहा- हे वासुदेव ! ये सत्य है। भाइयों के बीच हो रहे इस युद्ध को मैं उचित नहीं मानता इसी कारण इस युद्ध में भाग लेने की इच्छा मु...

वहशी लोग

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'मुरी' नाम का पर्वतीय शहर है पाकिस्तान में, इस्लामाबाद से करीब साठ किलोमीटर दूर .... लोग अक्सर वहाँ जाते हैं गर्मियों में, और तब भी, जब पहली - पहली बर्फ पडनी है सर्दियों में ... जैसे हिन्दुस्तान में मसूरी है, कुछ - कुछ वैसा ही है पाकिस्तान का ये 'मुरी' शहर ....        अभी कुछ दिनों पहले पाकिस्तानी नागरिकों का एक दल अपनी - अपनी मोटर-गाडियों पे निकला था मुरी के लिए, पहली - पहली बर्फ-बारी का मजा लेने के लिए .... हँसी - खुशी का माहौल था, vacation पर जाने में परिवारों का अच्छा लगता है हर जगह ...       पर ये क्या हुआ ?? .... बीच रास्ते में ही थे, तब मौसम अचानक खराब होने लगा .... पहले तो हल्की हल्की बर्फ गिर रही थी, फिर धीरे - धीरे वो ओला-वृष्टि, बर्फबारी में बदल गई ... बर्फीले तूफान, Blizard नें रास्ते को घेर लिया .... सडक पे गाडियां चलाना मुश्किल हो गया ....          गाडियों का काफिला रुक गया … सडक पे बर्फ की परतें जमा होने लगी .... लोगों नें इंतजार किया कि तूफान का जोर कम हो जाए, पर जब मौसम बदलने के कोई आसार दिखाई ...

लीलावती कौन थी ? | lilavati kon thi

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गणितज्ञ #लीलावती का नाम हममें से अधिकांश लोगों ने नहीं सुना है। उनके बारे में कहा जाता है कि वो पेड़ के पत्ते तक गिन लेती थी। शायद ही कोई जानता हो कि आज यूरोप सहित विश्व के सैंकड़ो देश जिस गणित की पुस्तक से गणित को पढ़ा रहे हैं, उसकी रचयिता भारत की एक महान गणितज्ञ महर्षि भास्कराचार्य की पुत्री लीलावती है। आज गणितज्ञो को गणित के प्रचार और प्रसार के क्षेत्र में लीलावती #पुरूस्कार से सम्मानित किया जाता है। आइए जानते हैं महान गणितज्ञ लीलावती के बारे में जिनके नाम से गणित को पहचाना जाता था। दसवीं सदी की बात है, दक्षिण भारत में #भास्कराचार्य नामक गणित और ज्योतिष विद्या के एक बहुत बड़े पंडित थे। उनकी कन्या का नाम लीलावती था। वही उनकी एकमात्र संतान थी। उन्होंने ज्यो‍तिष की गणना से जान लिया कि ‘वह विवाह के थोड़े दिनों के ही बाद विधवा हो जाएगी।’ उन्होंने बहुत कुछ सोचने के बाद ऐसा लग्न खोज निकाला, जिसमें विवाह होने पर कन्या विधवा न हो। विवाह की तिथि निश्चित हो गई। जलघड़ी से ही समय देखने का काम लिया जाता था। एक बड़े कटोरे में छोटा-सा छेद कर पानी के घड़े में छोड़ दिया जाता था। सूराख के ...

ताजमहल की बेंच अभिशप्त है !!

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क्या सचमुच ताजमहल के सामने की बेंच मनहूस है..??? 💐💐💐💐💐💐 मैं सोच रहा था कि आखिर टीना डाबी का अतहर के  साथ तलाक की नौबत क्यों आई ? फिर मुझे कहीं एक तस्वीर नजर आ गई जिसमें टीना और अतहर ताजमहल के सामने उस अभिशप्त बेंच पर बैठकर फोटो खींचे हैं । अब आप इतिहास जानिए कि इस अभिशप्त बेंच पर जितने प्रसिद्ध कपल बैठ कर फोटो खींच आए और इस अभिशप्त बेंच ने सिर्फ 1 महीने में अपना असर दिखा दिया.. व्लादिमीर पुतिन - सन 2000 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पत्नी ल्यूडमिला के साथ ताजमहल देखने पहुंचे थे। कुछ समय बाद दोनों का तलाक हो गया। प्रिंसेस डायना - 1992 में ब्रिटिश राजकुमारी डायना भी ताजमहल देखने पहुंची थीं। दस महीने बाद ही डायना और चार्ल्स का तलाक हो गया । टॉम क्रूज - 2011 में टॉम क्रूज फिल्म ‘मिशन इम्पॉसिबल: घोस्ट प्रोटोकॉल’ के वर्ल्ड प्रीमियर से पहले भारत पहुंचे थे और ताजमहल के सामने फोटो भी खिंचवाई थी। यहाँँ से लौटने के बाद 2012 में टॉम क्रूज का उनकी पत्नी कैटी होम्स से तलाक हो गया था । रसेल ब्रांड -कैटी पेरी: 2009 (दिसंबर) में हॉलीबुड एक्टर रसेल ब्रांड ताजमहल...

संस्कृति कैसे समाप्त होती है ???

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कोई संस्कृति समाप्त करनी है तो उससे उनके त्यौहार छीन लो। और यदि कोई त्यौहार समाप्त करना है तो उससे बच्चों का रोमांच गायब कर दो। कितना महीन षड्यंत्र है? कितना साफ और दीर्घकालिक जाल बुना जाता है? समझिए दीपावली पर पटाखे बैन के षड्यंत्र की कहानी.. पंच मक्कार(मीडिया, मार्क्सवादी, मिचनरीज, मुलाना, मैकाले) किस तरह से सुनियोजित कार्य करते है आप इस लेख के माध्यम से जान पाएंगे. किस तरह इकोसिस्टम बड़ा लक्ष्य लेकर चलता है वो आप जान पाएंगे. वे किस तरह 10, 20 साल की योजना बनाकर स्टेप बाई स्टेप नरेटिव सेट कर शनैःशनैः वार कर किले को ढहा देते है ये आप जानेंगे. जिसमें वे आपको ही अपनी सेना बनाकर अपना कार्य करते है और आपको पता भी नही चलता. पटाखो पर बैन की कहानी 2001 से शुरू होती है. जब एक याचिका में SC ने सुझाव दिया कि पटाखे केवल शाम 6 से 10 बजे तक मात्र चार घण्टे के लिए फोड़े जाए. साथ ही इसको लेकर जागरूकता फैलाने के लिए स्कूलों में बच्चों को बताया जाए. ये केवल एक सुझाव वाला निर्णय था ना कि पटाखे फोड़ने पर आपराधिक निर्णय. ध्यान रहे सुझाव केवल दीपावली पर ही था क्रिसमस और हैप्पी न्यूएर पर फैसले से ...